दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ सम्मान, पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति भवन में ग्रहण किया मेडल
झारखंड आंदोलन के महानायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक को देश का बड़ा सलाम; भावुक क्षणों के बीच संपन्न हुआ समारोह।
नई दिल्ली/रांची: झारखंड की धरती के महान जननायक और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया है। यह सम्मान उनके दीर्घकालिक सामाजिक, राजनीतिक और आदिवासी अधिकारों के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को एक बड़ी मान्यता देता है।
नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक बेहद गरिमामय और भव्य समारोह में उनकी पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने यह सम्मान ग्रहण किया।
📢 मुख्य हाइलाइट्स (Quick Highlights)
सम्मान: देश का प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ (मरणोपरांत)।
किसने ग्रहण किया: शिबू सोरेन की पत्नी श्रीमती रूपी सोरेन ने।
कहाँ आयोजित हुआ: राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।
विशेष उपस्थिति: माननीय गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी समारोह में मौजूद रहीं।
जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए जीवनभर का संघर्ष
शिबू सोरेन महज एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के प्रमुख वास्तुकार थे। उन्होंने आदिवासी समाज के हक, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनके द्वारा किए गए संघर्षों और आंदोलनों ने न केवल झारखंड, बल्कि पूरे देश के वंचित और शोषित समुदायों को सशक्त करने की एक नई राह दिखाई।
भावुक हुईं पत्नी रूपी सोरेन, कहा- ‘यह पूरे झारखंड का सम्मान’
राष्ट्रपति भवन में सम्मान ग्रहण करते हुए श्रीमती रूपी सोरेन काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने इस ऐतिहासिक पल पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि, “यह सम्मान सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और हमारे गौरवशाली आदिवासी समाज के संघर्षों का सम्मान है। यह हर उस व्यक्ति के लिए गर्व का क्षण है जो जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए खड़ा है।”
इस खास और ऐतिहासिक अवसर पर देशभर के कई वरिष्ठ राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने दिशोम गुरु को अपनी श्रद्धांजलि और सम्मान अर्पित किया। सभी ने एक सुर में कहा कि शिबू सोरेन का योगदान देश के इतिहास में हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा
सर्वोच्च सम्मान दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षमय जीवन, उनके कड़े सिद्धांतों और आदर्शों को देश की नई पीढ़ी तक पहुंचाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
This website uses cookies. By continuing to use this website you are giving consent to cookies being used. Visit our Privacy and Cookie Policy. I Agree