Home » संसद में चर्चा पर बोले अमित शाह: “विपक्ष 2 बजे तक पत्र दे, 3 बजे से शुरू करेंगे बहस, हर सवाल का दूँगा जवाब”
संसद में घमासान: “विपक्ष 2 बजे पत्र दे, 3 बजे से बहस शुरू”— अमित शाह ने संसद में चर्चा के लिए दिया खुला ऑफर !
नई दिल्ली ::केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने विपक्ष के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए स्पष्ट किया है कि मोदी सरकार संसद में हर विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन विपक्ष का उद्देश्य चर्चा करना नहीं, बल्कि केवल हंगामा खड़ा करना है।
“मैं स्वयं सदन में बैठूँगा, विपक्ष के एक-एक सवाल को लिखूँगा और कल दोपहर 3 बजे हर बात का विस्तार से जवाब दूँगा। जनता को तय करना है कि कौन चर्चा चाहता है और कौन बहस से भाग रहा है।”
— अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
गृह मंत्री का विपक्ष को सीधा प्रस्ताव
संसदीय गतिरोध को समाप्त करने के लिए गृह मंत्री ने विपक्ष के सामने एक स्पष्ट और समयबद्ध प्रस्ताव रखा:
समयसीमा: विपक्ष आज दोपहर 2:00 बजे तक लोकसभा अध्यक्ष को चर्चा के लिए पत्र सौंपे।
चर्चा की शुरुआत: सरकार आज ही दोपहर 3:00 बजे से बहस शुरू करने को तैयार है।
समय अवधि: यह चर्चा आज देर रात तक और कल दोपहर 3:00 बजे तक (लगभग 24 घंटे) निर्बाध रूप से चल सकती है।
प्रश्नकाल स्थगित करने का ऑफर: यदि लोकसभा अध्यक्ष अनुमति दें, तो सरकार विस्तृत चर्चा के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने को भी तैयार है।
‘नियमों के तहत होगी चर्चा, सिर्फ बयानबाजी नहीं’
विपक्ष की ओर से गृह मंत्री के बयान (Statement) की मांग पर अमित शाह ने कहा कि इतने गंभीर मुद्दों पर केवल औपचारिक बयान देकर इतिश्री नहीं की जा सकती।
संसदीय पद्धति में नियम और प्रक्रियाएं बनी हुई हैं।
गंभीर मुद्दों पर विस्तृत (at length) चर्चा होनी चाहिए।
नियमानुसार बहस पूरी होने के बाद ही सरकार की ओर से आधिकारिक वक्तव्य जारी किया जाएगा।
संसद ठप करने पर घेरा
अमित शाह ने कहा कि सत्र शुरू होने के पहले दिन से वे लगातार संसद आ रहे हैं, लेकिन विपक्ष दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित कर रहा है।
उन्होंने याद दिलाया कि संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू पहले ही सरकार का रुख साफ कर चुके हैं। जब विपक्ष ने चर्चा की मांग की, तो सरकार ने तुरंत ‘हाँ’ कर दिया। इसके बावजूद विपक्ष बहस से पीछे हट रहा है।
गृह मंत्री ने अंत में दोहराया कि अब गेंद विपक्ष के पाले में है—उन्हें तय करना है कि वे देश के सामने सच लाना चाहते हैं या केवल राजनीति करना चाहते हैं।