Home » फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर झारखंड में लैब टेक्नीशियनों का विशेष प्रशिक्षण
झारखण्ड को फाइलेरिया मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी: राँची में शुरू हुआ हाई-टेक ‘नाइट ब्लड सर्वे’ प्रशिक्षण; जानें क्या है सरकार का मेगा प्लान!
राँची (नामकुम): झारखण्ड सरकार ने राज्य से फाइलेरिया के पूरी तरह उन्मूलन के लिए अपनी कमर कस ली है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), झारखण्ड के तहत नामकुम स्थित लोक स्वास्थ्य संस्थान के सभागार में लैब टेक्नीशियनों के लिए ‘नाईट ब्लड सर्वे (NBS) माइक्रोस्कोपिक जांच’ को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है।
इस विशेष ट्रेनिंग के जरिए स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य जमीनी स्तर पर फाइलेरिया के परजीवियों की सटीक पहचान करना है, ताकि झारखण्ड को पूरी तरह फाइलेरिया मुक्त बनाया जा सके।
🗓️ जिलावार ट्रेनिंग शेड्यूल: आपके जिले की बारी कब?
यह एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के चिह्नित जिलों के प्रयोगशाला प्रावैधिकों (LT) के लिए जिलावार आयोजित किया जा रहा है:
11 जून 2026 (आज): सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम और चतरा जिले के लैब टेक्नीशियनों को सफलतापूर्वक ट्रेनिंग दी गई।
12 जून 2026 (कल): जामताड़ा, दुमका और गोड्डा जिले के विभिन्न प्रखंडों में तैनात लैब टेक्नीशियनों को मास्टर ट्रेनिंग दी जाएगी।
🔬 फाइलेरिया परजीवी की पहचान के लिए ‘गोल्डन मेथड’ का इस्तेमाल
वैक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (VBD) के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. बिरेन्द्र कुमार सिंह ने इस अभियान की बारीकियों को साझा किया:
क्यों जरूरी है यह सर्वे?: इस साल राज्य के चिह्नित जिलों में एमडीए/आईडीए (Mass Drug Administration) यानी सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम चलाया जाना है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दवा वितरण से पहले ‘नाइट ब्लड सर्वे’ करना अनिवार्य है।
सटीक जांच की ट्रेनिंग: डॉ. सिंह ने बताया कि फाइलेरिया परजीवी की सटीक पहचान के लिए आज भी ‘माइक्रोस्कोपिक मेथड’ को ही “गोल्डन मेथड” माना जाता है। इसलिए लैब टेक्नीशियनों का पूरी तरह निपुण होना बेहद जरूरी है।
रात में होगी जांच: ट्रेनिंग पाने के बाद ये प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन अपने-अपने क्षेत्रों में रात के समय जाकर ‘रक्त पट्ट संग्रह’ (Blood Sample Collection) करेंगे और उसकी बारीकी से जांच करेंगे।
🎓 पटना और NIMR के टॉप एक्सपर्ट दे रहे हैं ट्रेनिंग
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की गुणवत्ता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं:
राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (NIMR) और वरीय क्षेत्रीय निदेशक कार्यालय, पटना के बेहद अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा लैब टेक्नीशियनों को माइक्रोस्कोप के माध्यम से व्यावहारिक (Practical) ट्रेनिंग दी जा रही है।
🎯 लक्ष्य: जमीनी स्तर पर फाइलेरिया का खात्मा
आई.ई.सी. (IEC) के राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह ने कहा कि इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणाली के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यानी हमारे लैब टेक्नीशियनों को इतना सक्षम बनाना है कि वे गाँव-गाँव जाकर फाइलेरिया के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ सकें। सरकार का विजन स्पष्ट है—सटीक पहचान, सही इलाज और फाइलेरिया से पूर्ण मुक्ति।