Home » झारखंड में हाईटेक होंगे शहर: CM हेमंत सोरेन ने की GIS मैपिंग की समीक्षा
झारखंड के शहरों का होगा डिजिटल कायाकल्प: CM हेमंत सोरेन ने की GIS आधारित शहरी प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा, LiDAR सर्वे पूरा
रांची : झारखंड के शहरों को आधुनिक और हाईटेक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आज नगर विकास एवं आवास विभाग (UD&HD) के अंतर्गत JUIDCO द्वारा संचालित ‘GIS आधारित शहरी प्रबंधन प्रणाली’ (GIS-based Urban Management System) परियोजना की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना राज्य के सभी 49 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) में पारदर्शी, वैज्ञानिक और डेटा-आधारित शासन व्यवस्था लागू करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
📌 मुख्य हाइलाइट्स (Key Takeaways)
पायलट प्रोजेक्ट: पहले चरण में रांची, धनबाद और गिरिडीह नगर निगमों का चयन।
हवाई LiDAR सर्वे पूरा: तीनों पायलट शहरों में हवाई लेजर तकनीक (LiDAR) से सटीक सर्वे का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
डिजिटल मैपिंग: भवनों, सड़कों, स्ट्रीट लाइट, बिजली के खंभों और जल स्रोतों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड (जियो-टैगिंग) तैयार हो रहा है।
मुख्य उद्देश्य: शहरी नियोजन (Urban Planning) को वैज्ञानिक आधार देना और नगर निकायों के राजस्व (Revenue) को बढ़ाना।
हवाई सर्वे से तैयार हो रहा है डिजिटल मैप, रुकेगी टैक्स चोरी
समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत चल रहा डेटा प्रोसेसिंग का काम अंतिम चरण में है। इस तकनीक के माध्यम से शहरों की हर एक संपत्ति (Property) की जियो-टैगिंग की जा रही है।
“यह तकनीक शहरी नियोजन को एक वैज्ञानिक आधार देगी। इससे न सिर्फ नगर निकायों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी, बल्कि संपत्ति कर (Property Tax) की चोरी रुकेगी और नागरिक सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा।”
— श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री

CM सोरेन ने कड़े निर्देश दिए हैं कि इस परियोजना को निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। साथ ही, पायलट प्रोजेक्ट के अनुभवों के आधार पर इसे राज्य के अन्य सभी निकायों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई जाए।
क्या है GIS और LiDAR तकनीक और इसके फायदे?
सटीक डेटा प्रबंधन: इसके जरिए शहरों की सड़कों, नालियों, खाली जमीनों और सरकारी संपत्तियों का एक ‘डिजिटल रजिस्टर’ तैयार हो जाएगा।
जल निकायों की निगरानी: शहर के तालाबों और जल स्रोतों पर अतिक्रमण रोकने में मदद मिलेगी।
बेहतर नागरिक सुविधाएं: किसी भी इलाके में बुनियादी सुविधाओं (जैसे स्ट्रीट लाइट या पानी की पाइपलाइन) की कमी को कंप्यूटर स्क्रीन पर एक क्लिक से देखा जा सकेगा।
बैठक में शामिल रहे ये प्रमुख लोग
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में विभागीय मंत्रियों के साथ-साथ राज्य के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे:
श्री सुदिव्य कुमार सोनू (माननीय मंत्री, नगर विकास एवं आवास, उच्च शिक्षा एवं खेलकूद विभाग)
श्री अजय कुमार सिंह (विकास आयुक्त)
श्री सुनील कुमार (प्रधान सचिव, पथ निर्माण एवं नगर विकास विभाग)
श्री मुकेश कुमार (सचिव, योजना एवं विकास विभाग)
श्री सूरज कुमार (निदेशक, सूडा – SUDA)
सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी।
झारखंड सरकार का यह कदम राज्य के शहरी इलाकों को स्मार्ट और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है।