पलामू: केंद्र सरकार द्वारा देश को 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत झारखंड के पलामू जोन में नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने क्षेत्र में सक्रिय इनामी नक्सली कमांडरों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।
पलामू जोन में Palamu, Garhwa और Latehar जिले शामिल हैं। अप्रैल 2024 में पलामू को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर कर दिया गया था, जबकि वर्ष 2026 में गढ़वा को भी इस सूची से हटा दिया गया। फिलहाल लातेहार जिले को ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
पुलिस के अनुसार पलामू जोन में फिलहाल सात इनामी नक्सली कमांडर सक्रिय हैं। इनमें 15 लाख का इनामी माओवादी नितेश यादव, 10 लाख का इनामी संजय गोदराम, टीएसपीसी कमांडर शशिकांत गंझू, माओवादी कमांडर मनोहर गंझू, 15 लाख का इनामी रबिंद गंझू, 5 लाख का इनामी रामदेव लोहार उर्फ काका और माओवादी कमांडर राजू भुईयां शामिल हैं। सभी अलग-अलग इलाकों में सक्रिय हैं और पुलिस की निगरानी में हैं।
पलामू जोन के आईजी Shailendra Kumar Sinha ने बताया कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और नक्सलियों से सरेंडर कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील भी कर रही है।
सरकार की “नई दिशा” योजना के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास और सहायता प्रदान की जाएगी।
वहीं पलामू के डीआईजी Kishore Kaushal ने कहा कि नक्सलियों और उनके कमांडरों के खिलाफ सर्च अभियान लगातार जारी है और जल्द ही क्षेत्र को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है।
इधर लातेहार के बूढ़ापहाड़ इलाके में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने माओवादी संगठन के बड़े कमांडर मृत्युंजय को गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद इस इलाके में माओवादियों की लीडरशिप लगभग खत्म हो चुकी है।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि झारखंड-बिहार के नक्सल कॉरिडोर को कमजोर करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है और कई अहम ट्रेनिंग सेंटरों को भी ध्वस्त कर दिया गया है।
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