🏹 “आदिवासी समाज सिर्फ योजनाओं का लाभार्थी नहीं, सभ्यता का वाहक है”: पीएम मोदी के जाहेर थान दौरे पर बोले आदित्य साहू
राँची: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ ओडिशा के मयूरभंज स्थित पाहाड़पुर गांव में संथाली ‘जाहेर’ और ‘हो जाहेरा’ स्थलों पर पूजा-अर्चना करने को एक ऐतिहासिक और युगांतरकारी घटना बताया है।
आदित्य साहू ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह संभवतः पहला मौका है जब देश के किसी प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान आदिवासी पवित्र स्थलों का दौरा कर वहां माथा टेका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कदम भारत की जनजातीय जड़ों, सदियों पुरानी परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति उनके विराट व्यक्तित्व और गहरे सम्मान को दर्शाता है।
🪵 आदिवासी संस्कृति में क्या है ‘जाहेर थान’ और ‘मांझी थान’ का महत्व?
आदिवासी समाज की जीवन पद्धति और उनकी आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा:
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सामुदायिक जीवन का केंद्र: संथाल और ‘हो’ समुदायों के लिए जाहेर स्थल सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतीक हैं। आदिवासी समाज में मांझी थान और जाहेर थान का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है।
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जीवन का आधार: इन समुदायों का पूरा सामाजिक ताना-बाना और जीवन पद्धति इन्हीं स्थलों के इर्द-गिर्द केंद्रित होती है। समाज के सभी मांगलिक और सांस्कृतिक कार्य यहीं से संपन्न होते हैं। प्रधानमंत्री ने यहां पूजा कर इन धरोहरों को वैश्विक और राष्ट्रीय पहचान दी है।
🛡️ मोदी सरकार में जल, जंगल, जमीन के साथ ‘आदिवासी विरासत’ को मिली नई पहचान
श्री साहू ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने आदिवासी समुदायों की भूमिका को राष्ट्रीय इतिहास और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। उन्होंने सरकार के कई ऐतिहासिक नीतिगत निर्णयों को गिनाया:
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सर्वोच्च सम्मान: आजादी के 75 वर्षों बाद देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में आदरणीय द्रौपदी मुर्मु जी मिलीं, जो करोड़ों आदिवासियों के लिए गौरव का विषय है।
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दिशोम गुरु को सम्मान: झारखंड आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर आदिवासी नेतृत्व और उनके योगदान को राष्ट्रीय पटल पर दर्ज कर रही है।
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जनजातीय गौरव दिवस: भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती (15 नवंबर) को राष्ट्रीय स्तर पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में घोषित करना और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित भव्य संग्रहालयों की स्थापना करना।
📈 बजट से लेकर धरातल तक: आदिवासी क्षेत्रों का चौमुखी विकास
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार आदिवासियों के केवल सांस्कृतिक सम्मान ही नहीं, बल्कि उनके सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए भी प्रतिबद्ध है:
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PM जनमन योजना: इस योजना के माध्यम से देश के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के विकास और सशक्तिकरण की दिशा में क्रांतिकारी कदम उठाए गए हैं।
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एकलव्य मॉडल स्कूल: आदिवासी बच्चों को विश्वस्तरीय शिक्षा देने के लिए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का तेजी से विस्तार किया गया है।
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बुनियादी ढांचे में भारी निवेश: जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी (इंटरनेट) पर रिकॉर्ड निवेश किया गया है।
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“प्रधानमंत्री ने आदिवासियों के आस्था स्थल पर माथा टेककर पूरे देश को यह कड़ा संदेश दिया है कि आदिवासी समाज केवल सरकारी विकास योजनाओं का ‘लाभार्थी’ (Beneficiary) नहीं है, बल्कि वे भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के सबसे महत्वपूर्ण वाहक हैं।”
— आदित्य साहू, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा (झारखंड)




















