रांची: जोनल कार्यालय ने प्रवर्तन निदेशालय 26.03.2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 45 सहपठित धारा 44 के तहत, सीबीआई के विशेष न्यायाधीश-सह-पीएमएलए के तहत विशेष न्यायाधीश, रांची के समक्ष चार आरोपितों व्यक्तियों संजीव कुमार सिंह सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड), श्रीमती पूनम देवी उनकी पत्नी, गोपाल कुमार उनके छोटे भाई तथा राहुल कुमार कोयला ट्रांसपोर्टर) के विरुद्ध पीएमएलए, 2002 के तहत धन शोधन का अपराध करने के लिए अभियोजन शिकायत दायर की है।ईडी ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो भ्रष्टाचार निरोधक शाखा रांची द्वारा भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) के तहत आपराधिक षड्यंत्र, रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के अपराधों के लिए दर्ज एफआईआर और उसके बाद 09.12.2025 को आरोपियों के खिलाफ दायर आरोप-पत्र के आधार पर जांच शुरू की। यह जांच की जा रही यह मूल अपराध संजीव कुमार सिंह से संबंधित है, जो सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के भुरकुंडा प्रशिक्षण संस्थान में सहायक सुरक्षा उप-निरीक्षक के पद पर तैनात थे और बरका सयाल क्षेत्र के एरिया सुरक्षा प्रभारी के रूप में कार्यरत थे; उन्होंने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग करते हुए, सीसीएल के बरका सयाल क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाली कोयला खदानों से कोयला परिवहन में लगे निजी व्यक्तियों से अवैध आर्थिक लाभप्राप्त किया।ईडी की जाँच में यह साबित हुआ कि संजीव कुमार सिंह ने श्री राहुल कुमार जो कोयला ट्रांसपोर्टर हैं और जिनके पास सीसीएल की खदानों से कोयला ले जाने के लिए भारी मालवाहक वाहन हैं- से लगभग 5 लाख रुपये की अवैध रिश्वत सीधे अपनी पत्नी श्रीमती पूनम देवी के एक्सिस बैंक खाते में ली। यह रिश्वत उन्होंने अपने सुपरविज़न वाले इलाके में कोयला ट्रांसपोर्ट से जुड़े मामलों में अनुचित लाभ पहुँचाने के बदले में ली थी। इसके अलावा, श्रीमती पूनम देवी के खाते में लगभग 4.46 लाख रुपये की ऐसी नकद जमा राशि भी मिली, जिसके स्रोत के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सका। श्रीमती पूनम देवी ने जान-बूझकर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल अपराध से अर्जित आय (पीओसी) को जमा करने के मुख्य ठिकाने के तौर पर होने दिया, और उसके बाद उस रकम में से 4 लाख रुपये गोपाल कुमार (संजीव कुमार सिंह के छोटे भाई) के खाते में ट्रांसफर कर दिए। गोपाल कुमार ने यह पूरी रकम मिलने के सात दिनों के अंदर ही तेज़ी से खर्च कर दी-उन्होंने नकद निकासी की, अपने साथियों को पैसे ट्रांसफर किए, और गाड़ी के लोन की ईएमआई चुकाई: इस तरह उन्होंने अपराध से अर्जित आय को अपनी निजी आर्थिक देनदारियों में मिला दिया।जांच के दौरान, ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के तहत, आरोपियों के निजी बैंक खातों में जमा लगभग 9.46 लाख रुपये की राशि को अनंतिम रूप से कुर्क कर लिया। यह राशि ‘अपराध से अर्जित आय (पीओसी) के रूप में पहचाने गए धन के समतुल्य है। कुर्क की गई संपत्तियों में संजीव कुमार सिंह के एसबीआई बचत बैंक खाते में जमा राशि (लगभग 58 हज़ार रुपये) और श्री गोपाल कुमार के एसबीआई खाते में जमा राशि (लगभग 8.88 लाख रुपये) शामिल है। यह मामला माननीय विशेष न्यायालय में विचाराधीन है। आगे की जांच जारी है।
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