Home » चुनाव आयोग का बड़ा स्पष्टीकरण: आंतरिक मतभेद सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया, निष्पक्षता पर आयोग का बयान
आंतरिक मतभेद और टिप्पणियां सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा: भारत निर्वाचन आयोग !
नई दिल्ली : भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बुधवार को एक प्रेस नोट जारी कर आयोग के कामकाज, आंतरिक विचार-विमर्श, और डेटा सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर विस्तृत स्पष्टीकरण दिया है। निर्वाचन सदन से जारी इस बयान में आयोग ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली इस संस्था में आंतरिक टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और वैचारिक भिन्नता एक स्वस्थ और मानक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
संविधान और नियमों के तहत होता है कामकाज
चुनाव आयोग ने कहा कि वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय (Multi-member Constitutional Body) के रूप में कार्य करता है। आयोग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश, निर्णय और प्रशासनिक निर्देश कानूनी मान्यताओं के अनुरूप होते हैं और ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त एवं अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के तहत तय वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट स्तर पर चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाए गए प्रश्न या सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं।
विचार-विमर्श निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा
प्रेस नोट में कहा गया कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान में निर्णय लेने से पहले अलग-अलग राय या अवलोकन होना एक सामान्य बात है। न केवल तीनों चुनाव आयुक्त, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी व्यवस्था में सुधार के लिए अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है।
आयोग ने इस बात पर चिंता जताई कि 10 महीने की अवधि के दौरान की कुछ चुनिंदा आंतरिक टिप्पणियों को उजागर करना और आयोग द्वारा लिए गए व्यापक निर्णयों, सुधारों व निर्देशों को अनदेखा करना आधी-अधूरी तस्वीर पेश करता है।
बीते 1 वर्ष में हुए प्रमुख काम और चुनाव
40 नई पहलें: पिछले एक वर्ष में आयोग ने आम सहमति से कई सुधार लागू किए और 40 से अधिक नई पहलें शुरू कीं।
मतदाता सूची का पुनरीक्षण: देशभर में स्पेशल समरी रिवीजन (SIR) सहित मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य संपन्न कराया गया।
सफल चुनाव संचालन: बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव व उससे जुड़ी प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कराई गईं।
ECINet और डिजिटल सुरक्षा
आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, विशेषकर ECINet, की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि यह सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल और ऑडिट कंट्रोल के तहत काम करता है ताकि किसी भी अनधिकृत छेड़छाड़ को रोका जा सके।
साथ ही, कानून के तहत चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (EROs) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEOs) को मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं, जिसका वे नियमों के अनुसार पालन करते हैं।
चुनाव आयोग ने अंत में दोहराया कि वह पूर्ण निष्पक्षता और अखंडता के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने और भारतीय लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।