दिशोम गुरु शिबू सोरेन हमारे लिए ‘भारत के रत्न’ थे, हैं और सदैव रहेंगे” — पद्म भूषण सम्मान पर झारखंड का ऐतिहासिक और भावुक संदेश
माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा दिशोम गुरु को मरणोपरांत पद्म भूषण से अलंकृत किया जाना उनके आजीवन संघर्ष, त्याग और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण का सम्मान है।
रांची / नई दिल्ली:झारखंड अलग राज्य के निर्माण के महानायक, शोषितों-वंचितों की आवाज और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्य भूषण से नवाजा गया है। नई दिल्ली में आयोजित गरिमामय समारोह में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के हाथों बाबा के संघर्षों की जीवनसाथी (आदरणीय माँ) ने यह सर्वोच्च सम्मान ग्रहण किया।
यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन संघर्षों, मूल्यों और सपनों का सम्मान है, जिसके लिए विराट वृक्ष रूपी दिशोम गुरुजी जीवनभर अडिग होकर खड़े रहे। इस ऐतिहासिक क्षण पर राष्ट्रपति जी एवं केंद्र सरकार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया है।
💫 ‘सत्ता से अधिक जनता के दिलों में बनाई जगह’
ऐतिहासिक नेतृत्व: जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की लड़ाई में बाबा का योगदान अद्वितीय और अविस्मरणीय रहा।
कुरीतियों के खिलाफ जंग: सिर्फ राजनीतिक आंदोलन ही नहीं, बल्कि महाजनी व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण और शिक्षा की अलख जगाने में भी वे सदैव अग्रणी रहे।
करोड़ों दिलों के सम्राट: बाबा को किसी ने योद्धा कहा, तो किसी ने आदिवासियों के अधिकारों का प्रहरी। लेकिन वे ऐसे जननायक हैं जिन्होंने सत्ता से ऊपर उठकर जनता के दिलों में अपनी जगह बनाई।
अखिल भारत के शोषितों और पीड़ितों के प्रेरणाश्रोत
दिशोम गुरुजी का नेतृत्व केवल झारखंड तक सीमित नहीं था। जहाँ एक ओर उन्होंने झारखण्ड अलग राज्य के निर्माण के संघर्ष का नेतृत्व किया, वहीं दूसरी ओर वे पूरे देश (अखिल भारत) के राज्यों के आदिवासी, दलित, शोषित और पीड़ित समाज के संघर्ष के सबसे बड़े प्रेरणाश्रोत बनकर उभरे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मेहनतकश समाज के हक-अधिकारों की रक्षा में समर्पित कर दिया।
करोड़ों लोगों के हृदय में बाबा का स्थान सदैव ‘सर्वोच्च’
पुरस्कार और सम्मान का असली महत्व उस भावना में होता है जिसके साथ वह दिया जाता है। आज भले ही देश ने पद्म भूषण सम्मान से स्मृति शेष बाबा दिशोम गुरुजी के महान योगदान को नमन किया है, लेकिन झारखंड सहित देशभर के करोड़ों लोगों के हृदय में बाबा को जो स्थान प्राप्त है, वह सदैव सर्वोच्च रहा है।
“हमारे लिए दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी भारत के रत्न थे, हैं और सदैव रहेंगे। स्मृति शेष दिशोम गुरु शिबू सोरेन अमर रहें! जय झारखंड!”
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