Home » ‘उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट में 16.18 लाख मतदाताओं का सच’: निर्वाचन आयोग ने दावों को किया खारिज, कहा- कानून के तहत हुई SIR प्रक्रिया !
‘16.18 लाख मतदाता जोड़े जाने का दावा गलत’: निर्वाचन आयोग ने यूपी में SIR प्रक्रिया पर दी सफाई !
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को चुनाव आयोग ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि ये आरोप गलत और भ्रामक धारणाओं पर आधारित हैं। उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के निर्देशों के तहत ही आयोजित की गई है।
16.18 लाख फार्मों का सच क्या है?
रिपोर्ट में “उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में 16.18 लाख मतदाताओं का अचानक जुड़ना” बताए जाने वाले आरोप पर आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार, ये 16.18 लाख ‘फॉर्म-6’ (नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए) 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 के बीच चलाए गए गणना चरण (Enumeration Phase) के दौरान एकत्र किए गए थे।
ये फॉर्म बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर उन पात्र लोगों से एकत्र किए गए थे, जिनके नाम 27 अक्टूबर 2025 तक मौजूद मतदाता सूची में शामिल नहीं थे। यह पूरी कार्रवाई ECI द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को जारी निर्देशों के अनुपालन में की गई थी।
नाम छिपाने के आरोपों पर आयोग का जवाब
मतदाताओं के नाम छिपाने या उन्हें प्रकाशित न करने के आरोपों पर स्पष्टीकरण देते हुए आयोग ने बताया कि नियमों के तहत ड्राफ्ट रोल (प्रारूप मतदाता सूची) के प्रकाशन की तिथि (6 जनवरी 2026) से पहले प्राप्त आवेदनों और उसके बाद प्राप्त आवेदनों की प्रक्रिया अलग होती है।
‘रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ और ECI के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल उन्हीं आवेदनों (फॉर्म-6) को ‘फॉर्म-9’ की दावा सूची में शामिल किया जाता है, जो 6 जनवरी 2026 को प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्राप्त होते हैं। इन सभी दावों और आपत्ति अवधि के फॉर्मों को उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO UP) की आधिकारिक वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित भी किया गया था। इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।
फॉर्म-6 की स्वीकृति दर पर मनगढ़ंत दावे
रिपोर्ट में फॉर्म-6 की स्वीकृति (Acceptance Rate) के प्रतिशत को लेकर उठाए गए सवालों को आयोग ने मनगढ़ंत और काल्पनिक बताया है। आयोग ने कहा कि फॉर्म की स्वीकृति किसी तय प्रतिशत या फॉर्मूले के आधार पर नहीं होती, बल्कि नियमानुसार उचित जांच और प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही फॉर्म स्वीकार या अस्वीकार किए जाते हैं।
सर्वदलीय सहभागिता के साथ संपन्न हुई प्रक्रिया
निर्वाचन आयोग ने दोहराया कि उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी, निष्पक्ष और सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी के साथ आयोजित की गई थी। इस प्रक्रिया को लेकर अब तक किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति द्वारा कोई आधिकारिक शिकायत या आरोप दर्ज नहीं कराया गया है। आयोग के अनुसार, पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर संपन्न की गई है।