Home » बिहार में जन्म-मृत्यु पंजीकरण सुधरेगा, सरकार ने जारी की प्रोग्रेस रिपोर्ट
बिहार में डिजिटल सुशासन की नई पहल: जन्म-मृत्यु पंजीकरण को शत-प्रतिशत और समयबद्ध बनाने का महा-प्लान; पटना में जारी हुई प्रोग्रेस रिपोर्ट
योजना एवं विकास विभाग ने यूनिसेफ और यूएनईएससीएपी के साथ मिलाया हाथ; मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र मजबूत करने के दिए निर्देश
पटना, 15 जून 2026:
बिहार में सरकारी योजनाओं का लाभ हर नागरिक तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने और डेटा आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी शुरुआत की गई है। योजना एवं विकास विभाग के अंतर्गत अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय द्वारा आज पटना में “बिहार में नागरिक पंजीकरण एवं महत्वपूर्ण सांख्यिकी (CRVS) प्रणाली में सुधार” विषय पर एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और संयुक्त राष्ट्र एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCAP) के सहयोग से तैयार मूल्यांकन, विश्लेषण एवं पुनर्रचना (AAR) की प्रगति रिपोर्ट, नीति संक्षेपिका तथा जन-जागरूकता सामग्री का भव्य विमोचन किया गया।

📋 बिहार सीआरवीएस (CRVS) सुधार: एक नजर में
राज्य में नागरिक पंजीकरण प्रणाली को आधुनिक, पारदर्शी और पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए तैयार की गई रिपोर्ट और कार्यशाला के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
मुख्य मानक / स्तंभ
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वर्तमान स्थिति एवं भावी रणनीति
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संस्थागत जन्म दर
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बिहार में वर्तमान में लगभग 90% जन्म स्वास्थ्य संस्थानों (अस्पतालों) में हो रहे हैं।
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मुख्य फोकस
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संस्थागत पंजीकरण को मजबूत करने के साथ-साथ गैर-संस्थागत (घरों में होने वाले) जन्मों का शत-प्रतिशत पंजीकरण।
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प्रचार के माध्यम
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जन-जागरूकता के लिए सूचना पट्ट, पंपलेट, पुस्तिकाएं, नुक्कड़ नाटक और सामुदायिक अभियान।
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आगामी कदम
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रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर नए मानकीकृत कार्य संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का निर्माण होगा।
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💬 “प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, नागरिकों का अधिकार है पंजीकरण” — मंत्री श्रीभगवान सिंह
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और बिहार सरकार के योजना एवं विकास मंत्री श्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने पंजीकरण व्यवस्था की महत्ता पर जोर देते हुए कहा:
“जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण केवल एक सरकारी या प्रशासनिक कागजी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह नागरिकों तक सरकारी सेवाओं, लोक कल्याणकारी योजनाओं और उनके अधिकारों की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने का सबसे मजबूत माध्यम है। स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को इतना मजबूत किया जाए कि परिवारों तक पहुंचकर पंजीकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।”
⚡ डेटा आधारित नीति-निर्माण पर जोर
विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि इस प्रणाली के दो बड़े उद्देश्य हैं। पहला, सही समय पर सटीक और पूरी तरह विश्वसनीय आंकड़े जुटाना और दूसरा, उन आंकड़ों का सीधा उपयोग राज्य के विकास की नीतियां तय करने में करना। उन्होंने विशेष रूप से प्रवासी और वंचित परिवारों के बीच पंजीकरण संबंधी व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
📈 संस्थागत और गैर-संस्थागत पंजीकरण का सुदृढ़ीकरण
बिहार के विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह ने इस सहयोगात्मक पहल की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में 90 प्रतिशत संस्थागत जन्म होना एक बेहतरीन अवसर है। अब हमें अस्पतालों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले गैर-संस्थागत जन्मों और मृत्यु के मामलों के लिए निर्धारित नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि कोई भी नागरिक इस डेटाबेस से न छूटे।
🌍 वैश्विक विशेषज्ञों ने पेश किए निष्कर्ष
कार्यशाला के दौरान UNESCAP की सांख्यिकी विशेषज्ञ डॉ. क्लोई मर्सिडीज हार्वे तथा यूनिसेफ बिहार के विशेषज्ञ डॉ. अभय कुमार ने एएआर (AAR) रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि यह रिपोर्ट बिहार की पंजीकरण प्रणाली की चुनौतियों की पहचान कर उसे अधिक नागरिक-केंद्रित, दक्ष और उत्तरदायी बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके सुझाती है।
कार्यक्रम के अंत में अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय के निदेशक व मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म एवं मृत्यु) श्री रंजीत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस कार्यशाला में राज्य और जिला स्तर के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों और विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।