बौद्ध समाज की समस्याओं के समाधान को लेकर झारखंड अल्पसंख्यक आयोग की गंभीर पहल
रांची: झारखंड में बौद्ध समाज की बहुप्रतीक्षित मांगों और समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने कदम बढ़ाया है। आयोग के उपाध्यक्ष श्री ज्योति सिंह मथारू की अध्यक्षता में आज रांची स्थित परिसदन (Circuit House) में बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई।

इस बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए बौद्ध समाज के प्रमुख पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं को आयोग के समक्ष रखा।
बैठक में उठे प्रमुख मुद्दे और मांगें
बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी कई वर्षों से लंबित मांगों और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:
पर्यटन एवं धार्मिक स्थल: इटखोरी में ‘बौद्ध सर्किट’ का निर्माण तथा राज्य के सभी जिलों में बौद्ध विहारों के निर्माण हेतु भूमि का आवंटन।
शिक्षा एवं भाषा: झारखंड के सभी विश्वविद्यालयों में पाली भाषा की पढ़ाई शुरू कराना तथा बौद्ध शैक्षणिक संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा देना।
संरक्षण एवं बुनियादी ढांचा: बौद्ध संस्थानों, धरोहरों और धार्मिक स्थलों का संरक्षण, छात्रों के लिए छात्रावासों का निर्माण और शैक्षणिक संस्थानों को आवश्यक वित्तीय व प्रशासनिक सहायता।
संगठनात्मक ढांचा: बौद्ध समाज के कल्याण के लिए राज्यस्तरीय संगठन का गठन।
आयोग उपाध्यक्ष का आश्वासन
अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष श्री ज्योति सिंह मथारू ने समाज की सभी मांगों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने कहा:
“बौद्ध समाज की सभी मांगें जायज और प्रासंगिक हैं। आयोग समाज की समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएगा। इन सभी बिंदुओं को राज्य सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखकर सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
बौद्ध समाज ने जताया आभार
बैठक के समापन पर बौद्ध प्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पहली बार किसी संवैधानिक आयोग ने बौद्ध समाज की जमीनी समस्याओं की सुध ली है और समाधान का ठोस आश्वासन दिया है। समाज के पदाधिकारियों ने उपाध्यक्ष श्री ज्योति सिंह मथारू के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।














