Home » झारखंड के खनिज पर सेस का फैसला हमारा, भाजपा को दर्द क्यों? – झामुमो
खनिज हमारा तो फैसला भी झारखंड का: सेस के मुद्दे पर झामुमो का भाजपा पर तीखा हमला
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने खनिज संसाधनों पर राज्य सरकार द्वारा सेस (Cess) लगाए जाने के संवैधानिक अधिकार को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने गुरुवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर भाजपा से सवाल किया कि उसे झारखंड के हितों से परेशानी है या उन पूंजीपतियों से, जिन पर इस फैसले का आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संघीय ढांचे का हवाला
झामुमो महासचिव ने याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय की 9 सदस्यीय संविधान पीठ ने 8:1 के बहुमत से ऐतिहासिक निर्णय देते हुए राज्यों के खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर टैक्स या सेस लगाने की शक्ति को स्पष्ट मान्यता दी है। ऐसे में भाजपा द्वारा इस पर सवाल उठाना न केवल राज्यों के अधिकारों का हनन है, बल्कि देश की संघीय व्यवस्था को भी कमजोर करने का प्रयास है।
झामुमो के भाजपा से तीन सीधे सवाल
विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा नेताओं के सामने तीन मुख्य सवाल खड़े किए:
संवैधानिक अधिकार पर आपत्ति क्यों? जब देश की सबसे बड़ी अदालत ने राज्यों के कर लगाने के अधिकार पर मुहर लगा दी है, तो भाजपा को झारखंड द्वारा अपने खनिजों पर सेस तय करने से परहेज क्यों है?
स्थानीय जनता क्यों सहे नुकसान? खनिज झारखंड की धरती से निकलते हैं और इसके कारण विस्थापन, पर्यावरण नुकसान और प्रदूषण का दंश यहां के लोग झेलते हैं। फिर इससे मिलने वाले राजस्व पर फैसला लेने का हक झारखंड का क्यों नहीं होना चाहिए?
सस्ता खनिज चाहिए तो कहीं और से लें: यदि भाजपा के पूंजीपति मित्रों को झारखंड का खनिज महंगा लगता है, तो वे कहीं और से खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं। झारखंड को अपने बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
“झारखंड किसी की खनिजों की दुकान नहीं”
झामुमो नेता ने कहा कि दशकों से राज्य के कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों का बड़ा आर्थिक लाभ बाहर की कंपनियां उठाती रही हैं, जबकि यहां के आदिवासी और मूलवासी विस्थापन और जंगल-जमीन के नुकसान की कीमत चुकाते रहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अब पुरानी मानसिकता स्वीकार नहीं होगी। राज्य सरकार अपनी प्राकृतिक संपदा से होने वाली आय का इस्तेमाल यहां के खनन प्रभावित परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के कल्याण के लिए करेगी। भाजपा के किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झारखंड अपने प्राकृतिक व संवैधानिक अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।