Home » झारखंड में 32 लाख लोग सिकल सेल जीन से प्रभावित: रांची में खुलासा
सिकल सेल दिवस पर रांची सदर अस्पताल में महामंथन: झारखंड की 10% आबादी में सिकल सेल जीन; सिविल सर्जन ने कहा- “मुफ़्त जांच कराएं, शादी से पहले कुंडली नहीं, खून की जांच कराएं”
रांची: विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर शुक्रवार, 19 जून 2026 को सदर अस्पताल, रांची परिसर में सिकल सेल एनीमिया के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने हेतु एक विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के शीर्ष चिकित्सा पदाधिकारियों और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और राज्य में पैर पसार रही इस आनुवंशिक बीमारी से निपटने का रोडमैप साझा किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार, राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा, डॉ. राहुल किशोर सिंह, डॉ. पंकज और प्रख्यात हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन सहित भारी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
🩺 “गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच में सिकल सेल स्क्रीनिंग अनिवार्य” — सिविल सर्जन
सदर अस्पताल एवं जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा:
निःशुल्क जांच सुविधा: सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक (Genetic) लेकिन रोकथाम योग्य बीमारी है। रांची जिले के सदर अस्पताल समेत सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में इसकी जांच पूरी तरह निःशुल्क है।
गर्भावस्था में ही पहचान: वर्तमान में गर्भवती महिलाओं की ANC जांच के दौरान भी सिकल सेल स्क्रीनिंग को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है, ताकि गर्भ के समय ही जोखिम की पहचान कर उचित प्रबंधन किया जा सके। उन्होंने आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए ‘विवाह पूर्व सिकल सेल जांच’ को बढ़ावा देने की पुरजोर अपील की।
📊 डराने वाले आंकड़े: झारखंड में 32 लाख लोग सिकल सेल जीन के वाहक
सदर अस्पताल के हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन ने बीमारी की गंभीरता और राज्य की स्थिति पर कई चौंकाने वाले वैज्ञानिक आंकड़े पेश किए:
10% आबादी पर खतरा: झारखंड में सिकल सेल जीन का प्रसार चिंताजनक स्तर पर है। राज्य की लगभग 8 से 10 प्रतिशत आबादी (यानी करीब 32 लाख लोग) इस जीन के वाहक (Carriers) हैं, जबकि 1 से 2 प्रतिशत लोग पूरी तरह इस बीमारी से ग्रसित हैं।
शिशु मृत्यु का जोखिम: सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित बच्चों में 5 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु का जोखिम सबसे अधिक रहता है। यह बीमारी इंसान की जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को भी बुरी तरह प्रभावित करती है।
🚨 सिकल सेल के लक्षण, खतरे और बचाव के तरीके
डॉ. अभिषेक रंजन ने बताया कि इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाएं (RBCs) हंसिया के आकार (सिकल) की हो जाती हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह रुकता है:
प्रमुख लक्षण: हाथ-पैर, पेट और छाती में असहनीय दर्द (Crisis), बार-बार बुखार आना, गंभीर खून की कमी (Anemia), अत्यधिक थकान और सांस फूलना।
अंगों को नुकसान: समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की किडनी, फेफड़े और तिल्ली (Spleen) पूरी तरह डैमेज हो सकते हैं।
बचाव और वैक्सीन: हाइड्रॉक्सी यूरिया, फोलिक एसिड के नियमित सेवन और मेनिंगोकोकल व इन्फ्लुएंजा जैसी वैक्सीन लगवाने से मरीजों की जिंदगी को बेहतर और लंबा किया जा सकता है।
🤰 प्रसवपूर्व (Antenatal) जांच के लिए अपनाएं यह कड़ा मेडिकल प्रोटोकॉल
गर्भवती महिलाओं में रिस्क को कम करने के लिए डॉक्टरों ने विशेष मेडिकल गाइडलाइन बताई:
पहली तिमाही (First Trimester): गर्भवती महिला की एचपीएलसी (HPLC) जांच अनिवार्य रूप से हो।
पति की जांच: यदि महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आए, तो उसके पति की भी तत्काल जांच की जाए।
शिशु की जांच: यदि माता-पिता दोनों पॉजिटिव हैं, तो गर्भस्थ शिशु के हीमोग्लोबिन विकारों को पकड़ने के लिए एम्नियोसेंटेसिस या CVS (कोरियोनिक विलस सैम्पलिंग) तकनीक से गर्भ में ही जांच कर जेनेटिक काउंसलिंग की जानी चाहिए।
🔍 राज्य में जल्द शुरू होगा ‘विशेष सर्वेक्षण अभियान’: 0 से 5 और 18 से 35 आयु वर्ग पर फोकस
राज्य नोडल पदाधिकारियों ने सरकार की भविष्य की योजनाओं को सामने रखा:
25% रिस्क का गणित: आईईसी सेल के नोडल पदाधिकारी डॉ. राहुल किशोर सिंह ने बताया कि यदि माता-पिता दोनों ‘सिकल सेल ट्रेट’ (वाहक) हैं, तो बच्चे में यह बीमारी होने की संभावना 25 प्रतिशत होती है। इसके प्रचार-प्रसार के लिए व्यापक आईईसी सामग्री का उपयोग होगा।
फ्री ब्लड और वैक्सीन: ब्लड सेल के नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा ने घोषणा की कि राज्य में शीघ्र ही एक विशेष सर्वेक्षण अभियान शुरू होगा, जिसके तहत 0 से 5 वर्ष और 18 से 35 वर्ष के युवाओं की मुफ़्त स्क्रीनिंग होगी। राज्य सरकार मरीजों को निःशुल्क ब्लड और विशेष वैक्सीन दे रही है।
कार्यक्रम के समापन पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री प्रवीण कुमार सिंह ने नर्सिंग स्कूल की छात्राओं और सभी स्वास्थ्यकर्मियों का धन्यवाद किया।