Home » मुख्यमंत्री व्यवस्था सुधारें और जनता का भरोसा कायम करें: बाबूलाल मरांडी !
रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने प्रदेश की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जोरदार हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट साझा करते हुए मरांडी ने राज्य में गिरते प्रशासनिक ढांचे पर चिंता जताई और मुख्यमंत्री को आत्मचिंतन करने की सलाह दी।
विभिन्न घोटालों और अदालती कार्रवाइयों का किया उल्लेख
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े और उनकी सरकार के दौरान सामने आए विभिन्न मामलों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया:
जमीन घोटाला: मरांडी ने कहा कि जमीन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री के विरुद्ध पहले ही आरोप गठित हो चुके हैं।
ED अधिकारियों पर FIR मामला: हाईकोर्ट द्वारा ईडी अधिकारियों पर फर्जी SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराने के मामले में समय पर जवाब न देने पर ₹10,000 का जुर्माना लगाए जाने का जिक्र किया।
शराब घोटाला: एसीबी (ACB) कोर्ट में जांच एजेंसी द्वारा दी गई जानकारी का हवाला देते हुए मरांडी ने आरोप लगाया कि नीतिगत बदलावों के लिए उनके सचिव द्वारा ₹50 करोड़ की रिश्वत लेने की बात सामने आई है।
पत्थर घोटाला व पेपर लीक: पत्थर घोटाले में सीबीआई जांच के आदेश और पेपर लीक मामलों में करीबी लोगों की संलिप्तता के सबूतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
“लालू यादव और ममता बनर्जी के हश्र से लें सबक”
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए सचेत किया। उन्होंने कहा कि सत्ता और अधिकार कभी स्थायी नहीं होते।
मरांडी ने लिखा कि न तो हेमंत सोरेन, लालू प्रसाद यादव जितने राजनीतिक रूप से प्रभावशाली रहे हैं और न ही ममता बनर्जी जितने दमदार, लेकिन इसके बावजूद आज इन नेताओं की स्थितियां सबके सामने हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में सजायाफ्ता होने जैसी नौबत आती है, तो चुनाव लड़ने की पात्रता तक खतरे में पड़ सकती है। इसलिए मुख्यमंत्री और अधिकारियों को वक्त रहते वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए।
“सत्ता में रहते हुए अहंकार बहुत आसान लगता है, लेकिन सत्ता से बेदखल होने के बाद वही अहंकार सबसे बड़ा बोझ बन जाता है।” — बाबूलाल मरांडी
संसाधनों का उपयोग जनहित में करने की अपील
मरांडी ने मांग की कि राज्य के बालू, पत्थर, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों का उपयोग भ्रष्टाचारियों की जेब भरने के बजाय झारखंड की जनता के विकास, कल्याण और युवाओं के रोजगार के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रखंडों, थानों और सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की आवश्यकता पर बल दिया।
अपने संदेश के अंत में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अभी भी समय है कि मुख्यमंत्री अपनी कार्यशैली में सुधार लाएं और झारखंड की जनता का खोया हुआ विश्वास पुनः बहाल करने का प्रयास करें, अन्यथा इतिहास किसी के अहंकार को माफ नहीं करता।