⚡ “आदिवासियों का सम्मान सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट, हिम्मत है तो ‘सरना धर्म कोड’ लागू करे केंद्र”: लाल किशोर नाथ शाहदेव
रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव सह मीडिया विभाग के संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने भाजपा के दावों को पूरी तरह से भ्रामक, हकीकत से परे और आदिवासियों की आंखों में धूल झोंकने वाला बताया।
कांग्रेस नेता ने सीधे शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आदिवासियों के आस्था स्थल पर जाना केवल एक चुनावी स्टंट और इवेंट मैनेजमेंट का हिस्सा है, जबकि धरातल पर भाजपा की नीतियां हमेशा से आदिवासी विरोधी रही हैं।
🏹 सरना धर्म कोड और वन संरक्षण कानून पर दागे सीधे सवाल
शाहदेव ने आदिवासियों की अस्मिता और जल, जंगल, जमीन के अधिकार को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया:
सरना धर्म कोड क्यों दबाया?: उन्होंने सवाल किया, “अगर मोदी सरकार आदिवासियों की पहचान और उनकी परंपराओं के प्रति इतनी ही गंभीर है, तो झारखंड विधानसभा से सर्वसम्मति से पारित कर भेजे गए ‘सरना आदिवासी धर्म कोड’ को केंद्र सरकार अब तक दबाकर क्यों बैठी है?” आदिवासियों को अपनी अलग धार्मिक पहचान चाहिए, लेकिन भाजपा उन्हें केवल वोट बैंक समझकर उनका धार्मिक अस्तित्व मिटाना चाहती है।
कॉरपोरेट मित्रों को फायदा: एक तरफ भाजपा विकास का ढोंग रच रही है, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने वन संरक्षण कानून (Forest Conservation Act) में संशोधन कर आदिवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों से बेदखल करने की पूरी पटकथा लिख दी है। आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन को कौड़ियों के भाव पूंजीपतियों को सौंपा जा रहा है।
💥 “दिशोम गुरु शिबू सोरेन खुद एक आंदोलन हैं, भाजपा श्रेय न ले”
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिए जाने के भाजपा के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा:
राजनीतिक प्रताड़ना का आरोप: शिबू सोरेन झारखंड के करोड़ों आदिवासियों-मूलवासियों के दिल में बसते हैं। वे खुद एक जीवंत आंदोलन हैं। भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी पार्टी और इसकी केंद्रीय एजेंसियों ने दिशोम गुरु और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
श्रेय लेने की नाकाम कोशिश: आज जब वे जन-जन के सर्वमान्य नेता हैं, तो भाजपा उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक माइलेज लेने की नाकाम कोशिश कर रही है।
🏛️ राष्ट्रपति मुर्मु के अपमान और सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का उठाया मुद्दा
लाल किशोर नाथ शाहदेव ने विपक्ष के आदिवासी प्रेम के दावों की हवा निकालते हुए दो बड़े उदाहरण दिए:
संसद उद्घाटन का जिक्र: उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का नाम लेकर भाजपा अपनी पीठ थपथपाना बंद करे। पूरा देश गवाह है कि जब देश के नए संसद भवन का भव्य उद्घाटन हुआ, तो देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को संवैधानिक गरिमा के विपरीत किनारे कर दिया गया।
हेमंत सोरेन के खिलाफ साजिश: झारखंड में जनता द्वारा चुने गए एक बेहद लोकप्रिय आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सोची-समझी राजनीतिक साजिश के तहत जेल भेजने का पाप भी भाजपा ने ही किया है। झारखंड की जनता भाजपा के इस ‘दोगले चरित्र’ को अच्छी तरह समझ चुकी है और वक्त आने पर इसका करारा जवाब देगी।
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