Home » GST Council Meeting: झारखंड ने कोयले पर GST हटाने की उठाई मांग, हेमंत सरकार ने मांगा ₹1.36 लाख करोड़ का बकाया !
GST Council की बैठक में झारखंड का बड़ा दांव: “कोयले पर हटे GST, लागू हो राज्य VAT”; ₹1.36 लाख करोड़ के बकाए की उठाई मांग !
नई दिल्ली / रांची: GST काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड सरकार ने गंतव्य-आधारित (Destination-based) कर व्यवस्था के ढांचागत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे माननीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सबसे बड़ा योगदान देने वाले खनिज-समृद्ध राज्यों को GST की मौजूदा व्यवस्था के कारण भारी वित्तीय और पर्यावरणीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
झारखंड ने राष्ट्रीय हित और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूती देने के लिए कोयले को GST के दायरे से बाहर करने, पुरानी बकाया राशि के निपटारे और एक विशेष ‘Resource-Origin and Ecological Equalisation Framework’ की स्थापना की मांग की है।
1. देश की ऊर्जा सुरक्षा का आधार, फिर भी नुकसान में झारखंड
बैठक को संबोधित करते हुए बताया गया कि भारत के कुल कोयला भंडार का लगभग 23.27% हिस्सा अकेले झारखंड में है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल को मिलाकर पूर्वी भारत में देश का लगभग 57% कोयला भंडार मौजूद है। इसके बावजूद, पूर्वी क्षेत्र में स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता महज 10% के आसपास है, जबकि पश्चिमी, दक्षिणी और उत्तरी राज्यों में यह हिस्सेदारी काफी अधिक है।
मुख्य चिंता: गंतव्य सिद्धांत (Destination Principle) के तहत कोयले का GST उपभोग (Consuming) करने वाले राज्यों को चला जाता है। इससे झारखंड को केवल खदानों की समाप्त होती संपदा, विस्थापन, बुनियादी ढांचे पर दबाव और दशकों तक चलने वाले पर्यावरणीय नुकसान का सामना करना पड़ता है, जबकि इसके लिए आवश्यक राजस्व से राज्य वंचित रह जाता है।
2. बड़ा प्रस्ताव: “कोयले को GST से बाहर कर राज्य VAT लगाने की मिले अनुमति”
झारखंड ने काउंसिल के समक्ष एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया:
GST से राहत और VAT का अधिकार: कोयले पर वर्तमान GST व्यवस्था को समाप्त कर राज्यों को State VAT लगाने की अनुमति दी जाए।
2% CST का प्रावधान: अंतर-राज्यीय आवाजाही पर उत्पादक राज्यों को 2% Central Sales Tax (CST) लगाने का अधिकार मिले।
बिजली दरें होंगी सस्ती: इस व्यवस्था से कोयला-उत्पादक राज्यों का राजस्व बढ़ेगा और बिजली उत्पादन पर टैक्स का बोझ 18% से घटकर 5% पर आ जाएगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
3. GST डेटा में पारदर्शिता: Source–Destination–ITC–Settlement Statement की मांग
राज्य ने GST व्यवस्था के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मांग की कि आपूर्ति के स्रोत, गंतव्य, टैक्स देनदारी, ITC (Input Tax Credit) सृजन और निपटान (Settlement) के आंकड़ों को सार्वजनिक और संस्थागत बनाया जाए। इसके लिए राज्य-वार और HSN-वार आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने का अनुरोध किया गया।
4. राजस्व घाटा और ₹1.36 लाख करोड़ का बकाया
झारखंड ने विभिन्न केंद्रीय नीतियों और GST दरों में बदलाव से हुए भारी वित्तीय नुकसान का ब्योरा रखा:
GST दर rationalization से नुकसान: ~₹4,000 करोड़
VBGRAMG फंडिंग बदलाव: ~₹4,000 करोड़
MMDR एक्ट में बदलाव से अतिरिक्त बोझ: ~₹14,000 करोड़
GST मुआवजा उपकर (Compensation Cess) समाप्ति से घाटा: ~₹2,500 करोड़ (वार्षिक)
पुरानी बकाया राशि (Forfeited Pending Dues): लगभग ₹1.36 लाख करोड़
झारखंड सरकार ने इस वित्तीय अंतर को कम करने के लिए तत्काल वैकल्पिक सहायता या वित्तीय पैकेज देने का अनुरोध किया है।
5. ‘Resource-Origin and Ecological Equalisation Framework’ का प्रस्ताव
पर्यावरणीय न्याय (Environmental Justice) और अंतर-पीढ़ीगत समानता (Inter-generational Equity) को ध्यान में रखते हुए झारखंड ने एक पूरक ढांचे का प्रस्ताव रखा। इसके तहत गंतव्य-आधारित GST व्यवस्था को बनाए रखते हुए भी खनिज-उत्पादक राज्यों की निम्नलिखित चुनौतियों का आकलन कर वित्तीय आवंटन किया जाएगा:
निकाली गई खनिज की मात्रा और आर्थिक मूल्य।
विस्थापित आबादी, अनुसूचित/आदिवासी क्षेत्रों पर प्रभाव।
खनन के लिए परिवर्तित वन भूमि, जल संकट और प्रदूषण नियंत्रण खर्च।
खदान बंद होने के बाद भूमि सुधार और न्यायसंगत बदलाव (Just Transition) की जरूरतें।
निष्कर्ष: “सहकारी संघवाद में लागत और लाभ का समान बंटवारा जरूरी”
अपने संबोधन के अंत में झारखंड के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया कि राज्य राष्ट्रीय एकीकरण या संसाधनों के निर्बाध प्रवाह पर सवाल नहीं उठा रहा है। लेकिन सच्चा सहकारी संघवाद तभी संभव है जब विकास के लाभों के साथ-साथ उसकी दीर्घकालिक पर्यावरणीय और सामाजिक लागतों का निष्पक्ष बंटवारा हो।
झारखंड ने उम्मीद जताई कि केंद्रीय वित्त मंत्री और GST काउंसिल खनिज-समृद्ध राज्यों की इन जायज मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी।