⚡ “10 साल में 89 पेपर लीक, 1.4 करोड़ छात्रों का भविष्य अधर में”: रांची में गरजे कांग्रेस नेता; शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
रांची: देश में बेकाबू होती बेरोजगारी, परीक्षाओं में लगातार हो रही धांधली और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को रांची के कांग्रेस भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को प्रदेश मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी, प्रदेश मीडिया संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ. एम. तौसीफ और प्रवक्ता सोनाल शांति ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
कांग्रेस प्रवक्ताओं ने देश के युवाओं, नौकरीपेशा अभ्यर्थियों और छात्रों की बदहाली का पूरा कच्चा चिट्ठा आंकड़ों के साथ मीडिया के सामने रखा। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
📊 देश को झकझोरने वाले आंकड़े: ‘पेपर लीक’ बना राष्ट्रीय संकट
कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न स्वतंत्र अध्ययनों और हालिया परीक्षाओं का हवाला देते हुए बताया कि कड़े कानून के बावजूद जमीन पर कोई सुधार नहीं दिख रहा है:
परीक्षा का नाम |
प्रभावित छात्रों की संख्या |
वर्तमान स्थिति / प्रभाव |
|---|---|---|
नीट यूजी (NEET-UG 2026) |
🔍 लगभग 24 लाख |
भविष्य अधर में, मामला CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। |
यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती |
👮 48 लाख अभ्यर्थी |
पेपर सोशल मीडिया पर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द। |
सीटेट (CTET) |
📝 28 लाख से अधिक |
पेपर लीक के कारण उम्मीदवारों को लगा तगड़ा झटका। |
यूजीसी नेट (UGC-NET) |
🎓 11 लाख छात्र |
परीक्षा के अगले ही दिन पेपर रद्द कर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी। |
“10 वर्षों का काला सच: साल 2014 से 2024 के बीच देश में लगभग 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, जिसके कारण 48 बार दोबारा परीक्षाएं करानी पड़ीं। महज 5 वर्षों में 15 राज्यों के भीतर 41 पेपर लीक हुए, जिसने 1.4 करोड़ अभ्यर्थियों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया।” — लाल किशोर नाथ शाहदेव
💼 सरकारी नौकरियों में ‘कछुआ चाल’: 10 लाख से अधिक पद खाली
संवाददाता सम्मेलन में केंद्र सरकार के ही आधिकारिक आंकड़ों के हवाले से नौकरियों की कंगाली पर प्रहार किया गया:
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विभागीय वैकेंसियां: 1 मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9,64,359 पद खाली पड़े थे।
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सुरक्षा बल: 1 जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में भी 84,106 वैकेंसियां खाली थीं।
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रेलवे की सुस्ती: साल 2004-14 (UPA काल) के बीच जहां रेलवे में 4.11 लाख भर्तियां हुईं, वहीं 2014-24 (NDA काल) के बीच आवेदकों की संख्या करोड़ों बढ़ने के बावजूद यह आंकड़ा मामूली बढ़ोतरी के साथ सिर्फ 5.02 लाख तक ही पहुंच सका।
📉 शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी चरम पर, बढ़ रहे हैं सुसाइड केस
मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी और डॉ. तौसीफ ने युवाओं की मानसिक स्थिति और बेरोजगारी पर गहरी चिंता जताई:
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बेरोजगारी दर: 15-29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर सामान्य स्थिति में 10.2 प्रतिशत और साप्ताहिक आधार पर 13.8 प्रतिशत है।
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डिग्री धारक परेशान: स्वतंत्र शोध बताते हैं कि आज देश में सबसे ज्यादा बेरोजगार वही युवा हैं जो उच्च शिक्षित (स्नातक और स्नातकोत्तर/PG) हैं।
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छात्रों की आत्महत्या के डरावने आंकड़े: सिस्टम की नाकामी के कारण वर्ष 2022 में देश के कुल सुसाइड केसों में से 7.6% (लगभग 13,000) छात्रों के थे। सितंबर 2025 में जारी 2023 की रिपोर्ट में यह आंकड़ा और भी भयावह होकर अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। कोटा, त्रिशूर और चेन्नई जैसे प्रमुख कोचिंग हब ‘सुसाइड क्लस्टर’ बन चुके हैं।
📢 झारखंड कांग्रेस की केंद्र सरकार से दो टूक मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं:
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परीक्षाओं में धांधली और छात्रों के मानसिक उत्पीड़न की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
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देश की शिक्षा व्यवस्था को प्राइवेट माफियाओं के चंगुल से बचाने और सरकारी संस्थानों को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की जाए।
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खाली पड़े सभी 10 लाख से अधिक केंद्रीय पदों पर पारदर्शी तरीके से ‘समयबद्ध’ बहाली शुरू की जाए।


















