Home » शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलना पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात: आदित्य साहू
🏹 “दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलना जनजातीय अस्मिता और गौरवशाली विरासत का सम्मान”: आदित्य साहू
रांची, 23 जून 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड के प्रखर नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है। इसके साथ ही उन्होंने देश की महान विभूतियों को उचित सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का सहृदय आभार प्रकट किया है।
श्री साहू ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा प्रदान किया गया यह उच्च नागरिक सम्मान शिबू सोरेन के आजीवन संघर्ष, जनसेवा, आदिवासी अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक न्याय के प्रति उनके अटूट समर्पण का एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मान है।
🏛️ “मोदी सरकार में मिल रहा है गुमनाम और महान नायकों को उचित सम्मान”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज देश में हर क्षेत्र के असली नायकों को पहचान मिल रही है:
“आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में देश आज उन सभी महान विभूतियों के योगदान को उचित सम्मान दे रहा है, जिन्होंने समाज, संस्कृति और राष्ट्र के निर्माण में अपनी अमूल्य भूमिका निभाई है। दिशोम गुरु को पद्म भूषण मिलना इसी पारदर्शी और संवेदनशीलता से भरी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज की केंद्र सरकार राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माताओं का सम्मान कर रही है।”
✨ पूरे झारखंड के सर्वमान्य नेता थे शिबू सोरेन: सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ा संघर्ष
आदित्य साहू ने शिबू सोरेन के सामाजिक सुधारों और झारखंड आंदोलन में उनके योगदान को रेखांकित किया:
झारखंडवासियों के लिए गर्व का क्षण: झारखंड आंदोलन के प्रणेता, आदिवासी समाज की प्रखर आवाज़ और जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को सम्मानित किया जाना समस्त झारखंडवासियों के लिए परम गर्व और सम्मान का विषय है।
जनजातीय अस्मिता को समर्पित: यह सम्मान केवल किसी एक व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि झारखंड की जनजातीय अस्मिता, यहां की संघर्षशील परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को समर्पित है।
सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जंग: शिबू सोरेन केवल एक परिवार या एक विशिष्ट समुदाय के नेता नहीं थे, बल्कि वे पूरे झारखंड के सर्वमान्य नेता थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में शराबबंदी, शोषक महाजनी प्रथा और दहेज जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जमीन पर उतरकर ऐतिहासिक संघर्ष किया था।