झारखंड के लिए ऐतिहासिक और गौरवमयी क्षण: दिशोम गुरु शिबू सोरेन को लोकसेवा के लिए मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’ सम्मान
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने दी बधाई; बोले— “एक आंदोलनकारी से मुख्यमंत्री तक का उनका सफर जनविश्वास की जीवंत गाथा है”
रांची: झारखंड आंदोलन के महानायक, करोड़ों आदिवासियों-मूलवासियों की अस्मिता के प्रखर स्वर और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से विख्यात स्वर्गीय शिबू सोरेन जी को भारत सरकार द्वारा लोकसेवा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए मरणोपरांत देश के उच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया है। इस ऐतिहासिक घोषणा पर माननीय अध्यक्ष, झारखंड विधानसभा श्री रबींद्रनाथ महतो ने अपनी गहरी संवेदानाएं और हर्ष व्यक्त करते हुए इसे पूरे राज्य के लिए एक अविस्मरणीय और गौरव का क्षण बताया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने मंगलवार को जारी अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह सर्वोच्च सम्मान गुरुजी के जीवन भर के त्याग, अद्वितीय संघर्ष और जनता के प्रति उनके समर्पण की एक ऐतिहासिक और वैश्विक स्वीकृति है।
📊 दिशोम गुरु शिबू सोरेन: आंदोलन से पद्म भूषण तक का सफरनामा
स्वर्गीय शिबू सोरेन जी के ऐतिहासिक अवदान और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनके प्रति व्यक्त किए गए विचारों का सारांश नीचे तालिका में दिया गया है:
मुख्य बिंदु / क्षेत्र |
गुरुजी का ऐतिहासिक योगदान (Shibu Soren’s Legacy) |
विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो का वक्तव्य (Speaker’s Quote) |
|---|---|---|
सर्वोच्च नागरिक सम्मान |
लोकसेवा (Public Service) के क्षेत्र में मरणोपरांत ‘पद्म भूषण’। |
यह सम्मान अकेले गुरुजी का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के अस्मिता और संघर्ष का सम्मान है। |
जीवन यात्रा व सादगी |
जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए एक जुझारू आंदोलनकारी से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री पद तक का सफर। |
गुरुजी का जीवन सादगी, निरंतर जनसंघर्ष और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा की एक अमर मिसाल है। |
ऐतिहासिक अमिट छाप |
अलग झारखंड राज्य का निर्माण और शोषितों-वंचितों को उनका हक-अधिकार दिलाना। |
उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और जनसेवा ने यह साबित किया कि सतत और सच्चे संघर्ष से ऐतिहासिक बदलाव संभव है। |
⚡ “इतिहास के पन्नों में अमिट है गुरुजी का नाम” – रबींद्रनाथ महतो
स्वर्गीय शिबू सोरेन जी के व्यक्तित्व को नमन करते हुए झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने भावुक शब्दों में कहा:
“दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन जी का पूरा जीवन संघर्षों की एक ऐसी जीवंत गाथा है, जिससे आने वाली कई पीढ़ियां सदैव राष्ट्रसेवा और जनसेवा की प्रेरणा लेती रहेंगी। अलग झारखंड राज्य के निर्माण की रूपरेखा तैयार करने से लेकर झारखंडियों को उनके जल, जंगल, जमीन के हक-अधिकार दिलाने में गुरुजी का जो ऐतिहासिक योगदान रहा है, उसे इतिहास के पन्नों से कभी ओझल नहीं किया जा सकता। उनका कुशल नेतृत्व और जनविश्वास आज भी झारखंड की आत्मा में बसता है।”
📢 जनविश्वास और जनसंघर्ष की अमर गाथा है ‘दिशोम गुरु’
विधानसभा सचिवालय (PRO, JVS) द्वारा जारी विज्ञप्ति संख्या 24/6 के अनुसार, अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि गुरुजी ने हमेशा सत्ता से ऊपर उठकर जनमानस के मूल्यों को प्राथमिकता दी। उनका संघर्ष यह सिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी यदि इच्छाशक्ति दृढ़ हो, तो शोषित समाज को उसका अधिकार दिलाया जा सकता है। यह सम्मान मिलने से आज हर झारखंडी गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
यह न्यूज़ आर्टिकल आपके पोर्टल पर पब्लिश होने के लिए पूरी तरह तैयार है।


















